Shopping cart
₹0.00

Willmar Schwabe India Petroleum 1M (1000 CH) (30ml)

In stock

कॉर्न्स, दरारें, विदर, एक्जिमा, संयुक्त दर्द, सूजन ग्रंथियों के लिए।
For corns, cracks, fissures, eczema, Joint pains, swollen glands.

120.00

Description

WSI Petroleum 1M (1000 CH)

Medicine Name : Petroleum 1M 1000 CH
Company Name : Willmar Schwabe India
Ingredients Base : Homeopathic
Form : Drops
Presentation : 30 ML
Potency : 1M (1000 CH) (Dilution)

पेट्रोलियम – Petroleum

Common Name: Oleum petrae, Rock-oil, Coal Oil
सामान्य नाम: ओलियम पेट्रा, रॉक-ऑयल, कोयला तेल

Petroleum(Dilution) पेट्रोलियम

Trituration and tincture of the rectified oil is used as a medicine.
सुखाए गए तेल की त्रिदोष और टिंचर का उपयोग दवा के रूप में किया जाता है।

This is a highly carbonaceous oil but it is not a pure carbon
यह एक अत्यधिक कार्बनयुक्त तेल है लेकिन यह शुद्ध कार्बन नहीं है।

About medicine. औषधि के बारे में।

The important action of this drug is on the skin, due to which akota, skin bursts and pimples arise. Its activity also has an effect on the area of ​​the glands and digestive system. Petroleum medicine is used to cure many skin diseases, especially eczema and small pimples (eczema and herpes) which may not be in any place of the body. Heals diseases.
Most of the pimples occur in the ear and around the ear or on the cushion and hands, then this drug is used more to cure these pimples.
If a patient feels that I have had one leg or two legs while sleeping and another person is lying on my bed, it seems that I have two children lying on my bed. A woman suffering from this type of symptoms feels like how she will raise two children, such symptoms keep bothering her. These types of symptoms mostly occur in obstetric fever (typhoid fever), typhoid fever and diarrhea and many types of diseases. Use of petroleum medicine is beneficial to cure the symptoms of the patient suffering from such symptoms.
Use of petroleum medicine is beneficial to cure the disease caused due to consumption of more medicine or fever caused by the use of quinine.
Like sulfur-graphitis, lycopodium and causticum, petroleum medicine is also an antiseris drug. Petroleum medicine is a beneficial medicine to eliminate glass poisoning.
In cold weather, increase in symptoms of skin patient, it is good during summer season, use of petroleum medicine is beneficial in the condition of diarrhea after the disappearance of skin disease.
इस औषधि की महत्वपूर्ण क्रिया त्वचा पर होती है जिसके कारण अकौता, त्वचा का फटना और फुंसियां उत्पन्न होती हैं। ग्रन्थियों का क्षेत्र और पाचन प्रणाली पर भी इसकी क्रिया का प्रभाव होता है। कई प्रकार के चर्म रोगों को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि का प्रयोग होता है, विशेष करके एक्जिमा और छोटी-छोटी फुन्सियों के झुण्ड में (ऐक्जीमा एण्ड हरपेज) जो कि शरीर के किसी भी स्थान में क्यों न हो यह सभी प्रकार के ऐसे चर्म रोगों को ठीक कर देता है।
फुंसियां ज्यादातर कान के अन्दर और कान के चारों ओर या गद्दी और हाथों पर होती है तो इन फुंसियों को ठीक करने के लिए इस औषधि का उपयोग अधिक किया जाता है।
यदि किसी रोगी को नींद के समय में तथा बेहोशी के समय में ऐसा लगता है कि मेरी एक टांग दो टांग हो गई हैं, मेरे बिछौने पर कोई एक दूसरा आदमी लेटा हुआ है, ऐसा लगता है कि मेरे पास दो बच्चे लेटे हुए हैं। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित स्त्री को ऐसा लगता है कि वह दो बच्चों की परवरिश कैसे करेगी, इस प्रकार के लक्षण उसे परेशान करते रहते हैं। इस प्रकार के लक्षण अधिकतर प्रसूत ज्वर (पेरपेरल फीवर), टाइफाइड ज्वर (टाइफाइड फीवर) तथा दस्त की बीमारी और अनेकों प्रकार के रोगों में होता है। ऐसे लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि उपयोग लाभदायक है।
अधिक दवा के सेवन करने के कारण उत्पन्न रोग या क्विनाइन के प्रयोग से उत्पन्न बुखार को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि का उपयोग लाभकारी है।
सल्फार-ग्रैफाइटिस, लाइकोपोडियम तथा कास्टिकम औषधियों की तरह पेट्रोलियम औषधि भी एक ऐन्टिसेरिस औषधि है। शीशे के जहर को खत्म करने के लिए पेट्रोलियम औषधि एक लाभदायक औषधि है।
ठण्ड के मौसम में चर्म रोगी के लक्षणों में वृद्धि, गर्मी के मौसम में अच्छा रहता है, चर्म रोग के लुप्त हो जाने के बाद दस्त की समस्या होने पर पेट्रोलियम औषधि का उपयोग करने से लाभ मिलता है।

Use of petroleum medicine in various symptoms:
विभिन्न लक्षणों में पेट्रोलियम औषधि का उपयोग :

Symptoms related to mind:
Symptoms of a patient suffering from many skin diseases increase due to mental reasons, the patient forgets his way in the streets, sometimes the patient thinks that he is two or someone is lying next to him, It seems that he is going to die due to which he starts to do any work very quickly and wants to settle his work as soon as possible, the patient becomes irritable and he is easily irritated and is concerned about every subject. I remain dissatisfied, his eyesight becomes weak with insensitivity. Petroleum should be used to cure the symptoms of the patient suffering from such symptoms.
मन से सम्बन्धित लक्षण :
कई प्रकार के चर्म रोगों से पीड़ित रोगी के रोग के लक्षणों में मानसिक कारणों से वृद्धि होती है, रोगी गलियों में अपना रास्ता भूल जाता है, कभी-कभी रोगी सोचता है कि वह दो है या उसके बगल में कोई दूसरा लेटा हुआ है, उसे लगता है कि उसकी मृत्यु होने वाली है जिसके कारण वह कोई भी कार्य जल्दी-जल्दी करने लगता है और अपने कार्य को जल्दी से जल्दी निपटाना चाहता है, रोगी चिड़चिड़ा स्वभाव का हो जाता है और वह सहज ही चिढ़ जाता है और हर विषय के बारे में असन्तुष्ट रहता है, उत्साहहीनता के साथ ही उसकी दृष्टि कमजोर हो जाती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए।

Symptoms related to head:
The patient continues to have headaches and feels that cold air is blowing. Numbness is felt in the head and it seems that the head becomes stiff, heaviness is felt on the back of the head, the patient feels that he has become intoxicated. Often, there is pain in the back of the head, the pain does not heal quickly, this pain spreads from the top of the head to the forehead and eyes, due to fast pain, nothing is visible for a while, the body becomes stiff. And faint, the head feels heavy like a glass. The wound on the head becomes more on the ears behind the head. More pain is felt on touching the head after which the head becomes numb. Headache causes pain, the patient presses his temples to get some relief from the headache, the symptoms of the disease are increased due to jerking while coughing. Using petroleum medicine is beneficial in the symptoms related to this type of head.
सिर से सम्बन्धित लक्षण :
रोगी को सिर में दर्द होता रहता है और ऐसा महसूस होता है कि ठण्डी हवा बह रही हो। सिर में सुन्नपन महसूस होता है और ऐसा लगता है कि सिर कठोर बन जाता है, सिर के पीछे भारीपन महसूस होता है, रोगी को ऐसा लगता है कि नशा हो गया है। अक्सर सिर के पीछे के भाग में दर्द होता है, दर्द जल्दी ठीक नहीं होता है, यह दर्द सिर के ऊपर से माथा और आंखों तक फैल जाती है, दर्द की तेजी के कारण थोड़ी देर तक कुछ दिखाई नहीं देता, शरीर कड़ा पड़ जाता है और बेहोशी आ जाती है, सिर शीशे की तरह भारी महसूस होती है। सिर पर घाव हो जाता है सिर के पीछे कानों पर अधिक। सिर को छूने पर अधिक दर्द महसूस होता है उसके बाद सिर सुन्न पड़ जाता है। सिर में दर्द होता है, सिर दर्द से कुछ आराम पाने के लिए रोगी अपनी कनपटियों को दबाता है, खांसतें समय झटका लगने से रोग के लक्षणों में वृद्धि होती है। इस प्रकार के सिर से सम्बन्धित लक्षणों में पेट्रोलियम औषधि का प्रयोग करना फायदेमन्द होता है।

Symptoms related to eyes:
Eyesight becomes blurred, vision impairment arises, fine letters cannot read without specs, tears start flowing from the eyes, there is irritation on the edges of the eyelids and cracks occur in the corners of the eyes. The skin around the eyes becomes dry and crusted. Loss of Baraunia. Using petroleum medicine is beneficial to cure the symptoms of the patient suffering from such symptoms.
आंखों से सम्बन्धित लक्षण :
आंखों की दृष्टि धुंधली पड़ जाती है, दूरदृष्टि दोष उत्पन्न हो जाता है, बारीक अक्षरों को बिना ऐनक नहीं पढ़ सकता, आंखों से आंसू बहने लगता है, पलकों के किनारों पर जलन होती है तथा आंखों के कोनों में दरारें पड़ जाती हैं। आंखों के चारों ओर की त्वचा सूखी और पपड़ीदार हो जाती है। बरौनिया का झड़ना। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि का प्रयोग करना लाभदायक होता है।

Symptoms related to ear:
Many kinds of voices are heard in the ears and it seems that there is noise, especially in the place where people are talking. Acute, flaky wounds in the ear and back and also accompanied by severe itching. It hurts to touch the wound. Cracks occur on the skin around the ear, many types of sounds are heard in the ear during cold weather. Voices are heard inside the ears. Exudate resembles exudate from the ear and is less heard. If any person has any of these symptoms, then it is appropriate to use petroleum to cure the symptoms of his disease.
कान से सम्बन्धित लक्षण :
कानों में कई प्रकार की आवाजें सुनाई पड़ती है और ऐसा लगता है कि शोर मच रहा है, विशेषकर जहां लोग बातें कर रहे हो उस जगह पर। कान के अन्दर और पीछे अकौता, परतदार घाव तथा इसके साथ ही तेज खुजली होना। घाव को छूने पर दर्द होता है। कान के आस-पास की त्वचा पर दरारें पड़ जाती हैं, ठण्ड के मौसम में कान में कई प्रकार की आवाजें सुनाई पड़ती हैं। कानों के अन्दर आवाजें सुनाई पड़ती है। कान से पीब जैसा स्राव होने लगता है तथा कम सुनाई पड़ती है। इस प्रकार के लक्षणों में से यदि कोई भी लक्षण किसी व्यक्ति को हो गया है तो उसके रोग के लक्षणों को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि का प्रयोग करना उचित होता है।

Symptoms related to nose:
A wound occurs on the nostril of the nose and the nostril bursts, there is a burning sensation in the nose and itching. Bleeding from the nose, watery water from the nose, as well as secretions like rashes and phlegm. Petroleum should be used to cure the symptoms of the patient suffering from such symptoms.
नाक से सम्बन्धित लक्षण :
नाक के नथुने पर घाव हो जाता है तथा नथुना फट जाता है, नाक के अन्दर जलन होती है और खुजली भी होती है। नाक से खून बहना, नाक से पानी गिरने के साथ ही पपड़ियां और कफ के समान स्राव होना। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए।

Symptoms related to face:
The face becomes dry and shrunken. It is beneficial to use petroleum medicine to cure the symptoms of the patient suffering from such symptoms.
चेहरे से सम्बन्धित लक्षण :
चेहरा सूख जाता है और सिकुड़ा हुआ रहता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि का प्रयोग करना फायदेमन्द होता है।

Gastric symptoms:
The heart feels warm with burning sensation and sour belching and flatulence. Emptiness is felt inside the stomach, does not feel like eating fatty substances and meat, and eating cabbage causes problems. Immediately one becomes hungry after bowing. Mouth watering is filled with nausea. There is pain in the digestive system, and when the stomach is empty, it gets relief by eating continuously. Hunger seems intensified. One has to eat something after getting up at night time. If any of these symptoms have happened to a person and in addition, the patient smells of garlic, then using petroleum medicine is beneficial to cure the symptoms of his disease.
आमाशय से सम्बन्धित लक्षण :
हृदय में जलन होने के साथ ही गर्माहट महसूस होती है और खट्टी-खट्टी डकारें आती है और पेट फूलने लगता है। पेट के अन्दर खालीपन महसूस होता है, वसायुक्तपदार्थ और मांस खाने का मन नहीं करता है तथा बन्द गोभी खाने से परेशानी होती है। मलत्याग करते ही तुरन्त भूख लग जाती है। जी मिचलाने के साथ ही मुंह में पानी भर जाता है। पाचनतन्त्र में दर्द होता है और जब आमाशय खाली होता है तो लगतार खाते रहने पर आराम मिलता है। भूख तेज लगती है। रात के समय में उठकर कुछ न कुछ खाना पड़ता है। इस प्रकार के लक्षणों में से यदि कोई भी लक्षण किसी व्यक्ति को हो गया है तथा इसके साथ ही रोगी को लहसुन की बदबू भी आती है तो उसके रोग के लक्षणों को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि का प्रयोग करना लाभदायक होता है।

Symptoms related to stomach:
The patient gets diarrhea in the day time and the stool comes out at a faster rate like water and itching also occurs on the anus. After eating cabbage, the condition of diarrhea becomes even more serious and with this emptiness in the stomach is felt. Petroleum should be used to cure the symptoms of the patient suffering from such symptoms. It hurts when the stomach is empty, one gets relief by eating something continuously. Abdominal pain during pregnancy. It is advisable to use petroleum medicine to cure the symptoms of the patient suffering from such symptoms.
पेट से सम्बन्धित लक्षण :
रोगी को दिन के समय में दस्त हो जाता है और मल पानी की तरह और तेज गति से निकलता है तथा इसके साथ ही मलद्वार पर खुजली भी होती है। बन्दगोभी खाने के बाद दस्त की अवस्था और भी गम्भीर हो जाती है तथा इसके साथ ही आमाशय में खालीपन महसूस होता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए। पेट खाली रहने पर दर्द होता है, लगातार कुछ न कुछ खाने से आराम मिलता है। गर्भावस्था के समय में पेट में दर्द होना। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि का प्रयोग करना उचित होता है।

Symptoms related to male disease:
Ringworm lesion occurs below the navel of the patient and above the genitals. There is burning sensation in the foreskin and it is swollen. Itching occurs in the urethra. Petroleum should be used to cure the symptoms of the patient suffering from such symptoms.
पुरुष रोग से सम्बन्धित लक्षण :
रोगी की नाभि के नीचे और जननेन्द्रिय के ऊपर के भाग में दाद जैसा घाव हो जाता है। पुर:स्थग्रन्थि में जलन होती है और वह सूजी हुई रहती है। मूत्रमार्ग में खुजली होती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए।

Symptoms related to gynecology:
Before menstruation there is a vibration in the head and itching on the genitals. Leucorrhoid secretion occurs in greater quantity and food-like substance also comes in the secretion. A wound occurs on the genitals and wetness is felt on these parts. Itching occurs on the chicken pox and it feels like a paste on the dough. Every day, leucorrhoea occurs and dreams of sexual intercourse at night and vaginal itching and sweating occur. If any of these symptoms have happened to a woman, then using petroleum medicine to cure the symptoms of her disease is beneficial.
स्त्री रोग से सम्बन्धित लक्षण :
मासिकस्राव आने से पहले सिर में कंपन होती है तथा जननेन्द्रियों पर खुजली होती है। प्रदर स्राव अधिक मात्रा में होता है और स्राव में अन्न जैसा पदार्थ भी आता रहता है। जननेन्द्रियों पर घाव हो जाता है तथा इन भागों पर गीलापन महसूस होता है। चूचक पर खुजली होती है और उस पर आटे जैसा लेप लगा हुआ महसूस होता है। प्रतिदिन दिन के समय में प्रदर स्राव आता है और रात को संभोग करने के सपने आते हैं और योनि में खुजली होती है और पसीना आता है। इस प्रकार के लक्षणों में से यदि कोई भी लक्षण किसी स्त्री को हो गया है तो उसके रोग के लक्षणों को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि का प्रयोग करना फायदेमन्द होता है।

Symptoms related to breathing institute:
A sore throat is felt. Dry cough and suffocation are felt at night. Cough is so strong that it causes headache. Chest feels suffocating and cold air is felt more. Dry cough occurs at night time and cough arises from the chest deep. Sores occur in the larynx and diphtheria also occurs with it. If a person has any of these symptoms, then using petroleum medicine is beneficial to cure the symptoms of his disease.
श्वास संस्थान से सम्बन्धित लक्षण :
गले में खराश महसूस होती है। रात के समय में सूखी खांसी और घुटन महसूस होती है। खांसी इतनी तेज होती है कि उसके कारण सिर में दर्द भी होने लगता है। छाती में घुटन महसूस होती है तथा ठण्डी हवा अधिक महसूस होती है। रात के समय में सूखी खांसी होती है और खांसी छाती की गहराई से उठती है। स्वरयन्त्र में खराश उत्पन्न होता है और इसके साथ ही डिफ्थीरिया भी हो जाता है। इस प्रकार के लक्षणों में से यदि कोई भी लक्षण किसी व्यक्ति को हो गया है तो उसके रोग के लक्षणों को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि का प्रयोग करना लाभदायक होता है।

Symptoms related to heart:
Coldness is felt on the heart and at the same time it begins to faint and the heartbeat also becomes irregular and there is more excitement in the heart. Petroleum should be used to cure the symptoms of the patient suffering from such symptoms.
हृदय से सम्बन्धित लक्षण :
हृदय पर ठण्डक महसूस होती है और इसके साथ ही बेहोशी होने लगती है और हृदय की धड़कन भी अनियमित हो जाती है तथा हृदय में अधिक उत्तेजना होती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए।

Symptoms related to back:
There is pain on the back joint of the neck and back swells and it hurts. Pain occurs along with feeling weakness around the waist. There is pain in the lower part of the spine. It is beneficial to use petroleum medicine to cure the symptoms of the patient suffering from such symptoms.
पीठ से सम्बन्धित लक्षण :
गर्दन के पिछले जोड़ पर दर्द होता है तथा पीठ अकड़ जाती है और उसमें दर्द होता है। कमर के आस-पास कमजोरी महसूस होने के साथ ही दर्द होता है। रीढ़ की हड्डी के निचले भाग में दर्द होता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि का प्रयोग करना फायदेमन्द होता है।

Symptoms related to external organs of the body:
Chronic sprain in any part of the body. Excessive smelly sweating from armpits. Knee stiffness and pain like burning on the knee. The tip of the fingers feels rough, cracked and cold and cracks on it. Cracking on the joints of any bones of the body. If any person has any of the symptoms related to the external organs of this body, then it is appropriate to use petroleum medicine.
शरीर के बाहरी अंगों से सम्बन्धित लक्षण :
शरीर के किसी भी अंग में पुरानी मोच का रोग। कांख से अधिक मात्रा में बदबूदार पसीना आना। घुटनों में अकड़न होना तथा घुटने पर जलने जैसा दर्द होना। उंगलियों की नोक खुरदरी, फटी हुई तथा ठण्डी महसूस होती है तथा उस पर दरारें पड़ जाती है। शरीर के किसी भी हडि्डयों के जोड़ों पर कड़कड़ाहट होना। इस प्रकार के शरीर के बाहरी अंगों से सम्बन्धित लक्षणों में से यदि कोई भी लक्षण किसी व्यक्ति को हो तो उसे पेट्रोलियम औषधि का प्रयोग करना उचित होता है।

Symptoms related to skin disease:
Itching in many parts of the body at night time. Wound and irritation caused due to cold in many parts of the body. In cold weather, fingers crackle and there is sickness and pain in them. Injury caused due to injury, which is later cured and filled with exudate. Wound on back caused by sleeping in bed. The skin of the body becomes dry and shrunken, the skin is rough and torn and there are many types of wounds. Due to slight scratches on the skin of the body, the place has been bruised and wound. Scabby sores on skin and pimples on hands. Thick, green crusts on the skin and they have burning and itching, skin rash, and bleeding from the wound. Having unforeseen disease. Red, saline secretion and burning wound occur on hands and feet. Cracked wounds on the skin and such symptoms increase in the time of cold. There is small pimples on the skin before eczema ie eczema disease, and then it gets divided and a thick crust builds up and pus comes out of it. There is such itching in the urethra of a patient suffering from chronic gonorrhea that the patient cannot sleep overnight. The area between the ureter and the anus, that is, in the suture (chamatpadamnau) and in the grandchildren, there is a lump of pimples with more intense itching and irritation, the puffing of these pimples releases more contaminated fluid like water. Eczema occurs in the hands and feet, on the scalp in the thigh, behind both corners, in the anus and testicles. Patient’s hands are torn from eczema disorder and they bleed. These diseases increase in the time of cold. This type of skin disease of the patient often originates in a place where the skin remains dry, hoarse and chitki especially on the front part of the fingers. If any person has any of the symptoms related to this type of skin disease, then the use of petroleum should be used to cure the symptoms of his disease.
चर्म रोग से सम्बन्धित लक्षण :
रात के समय में शरीर के कई अंगों में खुजली होना। शरीर के कई अंगों में ठण्ड के कारण उत्पन्न घाव और उसमें जलन होना। ठण्ड के मौसम में उंगलियों का चटकना और उन पर बिवाई रोग होना तथा उसमें दर्द होना। चोट लगने के कारण उत्पन्न जख्म जो बाद में पककर पीब से भर जाता है। बिस्तर पर सोने के कारण उत्पन्न पीठ पर घाव। शरीर की त्वचा सूखी होना और सिकुड़ी हुई रहना, त्वचा खुरदरी और फटी हुई होना तथा कई प्रकार के घाव होना। शरीर की त्वचा पर हल्की सी खरोंच लगने से वह स्थान पककर घाव हो गया हो। त्वचा पर पपड़ीदार घाव होना और हाथ पर फुंसियां होना। त्वचा पर मोटी, हरी रंग की पपड़ियां होना तथा इनमें जलन होना और खुजली होना, त्वचा लाल फटी हुई लगना और घाव में से खून का स्राव होना। अकौता रोग होना। हाथ-पैरों पर लाल, नमकीन स्राव भरा तथा जलन युक्त घाव हो जाता है। त्वचा पर दरार युक्त घाव होना और ठण्ड के समय में इस प्रकार के लक्षणों में वृद्धि होना। त्वचा पर छाजन अर्थात एक्जिमा रोग होने से पहले छोटी-छोटी फुंसियां होती है फिर फूटकर एक हो जाती हैं और उनके ऊपर मोटी सी पपड़ी जम जाती है और उस में से मवाद आता रहता है। पुराने सुज़ाक रोग से पीड़ित रोगी की मूत्रनली में इस कदर खुजली होती है कि रोगी रात भर सो नहीं सकता है। मूत्रद्वार और मलद्वार के बीच के स्थान अर्थात सीवन में (चमतपदमनउ) और पोते में झुण्ड के झुण्ड फुंसिया हो जाती है जिसमें अधिक तेज खुजली होती है और जलन होती है, इन फुंसियों के फुटने से अधिक पानी जैसा दूषित तरल पदार्थ निकलता है। दानें हाथ और पैरों में, जांघ में खोपड़ी पर दोनों कोनों के पीछे, मलद्वार तथा अण्डकोष में एक्जिमा हो जाता है। रोगी के हाथ एक्जिमा के विकार से फट जाते हैं और उनसे खून बहता है। ठण्ड के समय इन रोगों में वृद्धि हो जाती है। रोगी की इस प्रकार के चर्म रोग अक्सर ऐसे स्थान में निकलती हैं जहां की खाल खुश्क, खुरखुरी और चिटकी रहती हैं विशेष करके अंगुलियों के आगे के भाग पर। इस प्रकार के चर्म रोग से सम्बन्धित लक्षणों में से यदि कोई भी लक्षण किसी व्यक्ति को हो गया है तो उसके रोग के लक्षणों को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि का प्रयोग करना चाहिए।

Symptoms related to feces:
The patient suffering from diarrhea experiences abdominal pain. Cabbage, sour sour milk, diarrhea occurs during pregnancy or stormy weather. Chronic diarrhea (diarrhea) and diarrhea comes only during day time and at night time. The stool comes out yellow, thin and fast. Diarrhea comes with pain in the intestines and stinging sensation in the anus and gonadal. Umbilical piles and wounds are formed in the anus. Using petroleum medicine is beneficial to cure the symptoms of the patient suffering from such symptoms.
मल से सम्बन्धित लक्षण :
दस्त रोग से पीड़ित रोगी के पेट में दर्द होता है। बन्दगोभी, खट्टी कमरख खाने से, गर्भावस्था या तूफानी मौसम में दस्त हो जाता है। पुराना अतिसार (दस्त) तथा केवल दिन के समय में दस्त आना और रात के समय में आराम मिलता है। मल पीला, पतला और तेज गति से निकलता है। आंतों में दर्द होने के साथ ही दस्त आता है तथा गुदा और गुदानली में डंक लगने जैसी पीड़ा होती है। उघड़ी हुई बवासीर तथा गुदा में घाव की पर्ते बनती हैं। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि का प्रयोग करना लाभदायक होता है।

Symptoms related to urine:
There is more desire to urinate and in addition there is itching in the urethra. Itching on the urethra along with chronic gonorrhea disease. Petroleum medicine should be taken to cure the symptoms of the patient suffering from such symptoms.
मूत्र से सम्बन्धित लक्षण :
पेशाब करने की अधिक इच्छा होती है और इसके साथ ही मूत्रनली में खुजली भी होती है। पुराना सूजाक रोग होने के साथ ही मूत्रमार्ग पर खुजली होना। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि का सेवन करना चाहिए।

Symptoms related to fever:
The body gets cold and fever due to cold, followed by sweating, feeling heat on the head and face, and in the night time, such symptoms increase and perspiration comes from the legs and axes. It is advisable to use petroleum medicine to cure the symptoms of the patient suffering from such symptoms.
ज्वर से सम्बन्धित लक्षण :
ठण्ड से शरीर में कंपकंपी होकर बुखार आना तथा इसके बाद पसीना आना, सिर और चेहरे पर गर्मी महसूस होना और रात के समय में इस प्रकार के लक्षणों में वृद्धि होना तथा पैरों व कांखों से पसीना आता रहता है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि का प्रयोग करना उचित होता है।

Symptoms related to cold:
Cold is felt at 6 in the evening and nails turn blue, cold is felt more in open air and itching all over the body. It is beneficial to use petroleum medicine to cure the symptoms of the patient suffering from such symptoms.
शीत से सम्बन्धित लक्षण :
शाम के 6 बजे ठण्ड महसूस होती है और नाखून नीले पड़ जाते हैं, खुली हवा में ठण्ड अधिक महसूस होती है और सारे शरीर में खुजली होती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि का प्रयोग करना फायदेमन्द होता है।

Symptoms related to heat (hot):
Head warm, face ruddy, fever is felt all over the body. Use of petroleum medicine is beneficial to cure the symptoms of the patient suffering from such symptoms.
उत्ताप (गर्म) से सम्बन्धित लक्षण :
सिर गर्म, चेहरा सुर्ख, बुखार की झलक सारे शरीर में महसूस होती है। ऐसे लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि उपयोग लाभदायक है।

Symptoms related to heat (hot):
Head warm, face ruddy, fever is felt all over the body. Use of petroleum medicine is beneficial to cure the symptoms of the patient suffering from such symptoms.
Symptoms related to sweating:
Sweating comes from many parts of the body at different times and sweat comes mostly after the cold and no heat is felt. It is beneficial to use petroleum medicine to cure the symptoms of the patient suffering from such symptoms.
पसीना से सम्बन्धित लक्षण :
भिन्न-भिन्न समय पर शरीर के कई भागों से पसीना आता है ओर पसीना अधिकतर ठण्ड के बाद आता है और गर्मी महसूस नहीं होती है। इस प्रकार के लक्षणों से पीड़ित रोगी के लक्षणों को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम औषधि का प्रयोग करना फायदेमन्द होता है।

Increment:
At or before the time of typhoon, eating cabbage and kamarkha, touching the diseased part during pregnancy, from moisture, traveling, idle motion, during cold, eating and mental conditions Symptoms of the disease increase with this.
वृद्धि (ऐगग्रेवेशन) :
आंधी तूफान आने के समय में या उससे पहले, बन्दगोभी तथा कमरख खाने से, गर्भावस्था के समय में रोग ग्रस्त भाग को छूने से, नमी से, यात्रा करने से, निष्क्रिय गति करने से, ठण्ड के समय में, भोजन करने से और मानसिक दशाओं से रोग के लक्षणों में वृद्धि होती है।

Mitigation (Amalieration. Depletion):
Symptoms of the disease start by lifting the head high and lying down, with hot air and moving in dry area.
शमन (एमेलिओरेशन. ह्रास) :
सिर को ऊंचा उठाकर लेटने से, गरम हवा से तथा शुष्क प्रदेश में घूमने से रोग के लक्षण नष्ट होने लगते हैं।

Relationship:
Some properties of carbo, sulf, phospho and grapha drugs can be compared with petroleum medicine.
सम्बन्ध (रिलेशन) :
कार्बो, सल्फ, फास्फो तथा ग्रैफा औषधियों के कुछ गुणों की तुलना पेट्रोलियम औषधि से कर सकते हैं।

Complement: Sepia.
पूरक : सीपिया।

Antiseptics: Nux, cakulus drug is used to destroy the harmful effects of petroleum medicine.
प्रतिविष : नक्स, काक्कूलस औषधि का उपयोग पेट्रोलियम औषधि के हानिकारक प्रभाव को नष्ट करने के लिए किया जाता है।

Side effects , दुष्प्रभाव :

There are no such side effects. But every medicine should be taken following the rules as given. 
ऐसे कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं। लेकिन हर दवा को दिए गए नियमों का पालन करना चाहिए।

It is safe to take the medicine even if you are on other mode of medication like allopathy medicines, ayurvedic etc. 
यदि आप किसी अन्य चिकित्सा पद्धति जैसे एलोपैथी दवाओं, आयुर्वेदिक आदि पर हैं तो भी दवा लेना सुरक्षित है।

Homeopathic medicines never interfere with the action of other medicines.
होम्योपैथिक दवाएं कभी भी अन्य दवाओं की कार्रवाई में हस्तक्षेप नहीं करती हैं।

Dosage and rules while taking :
लेते समय खुराक और नियम:

Take 5 drops in half cup of water three times a day.
आधा कप पानी में 5 बूंद दिन में तीन बार लें।

How to take medicine :
1 : Take homeopathic medicine 30-40 minutes before meals or 30-40 after meals.
होम्योपैथिक दवा भोजन से 30-40 मिनट पहले या भोजन के 30-40 मिनट बाद लें।

2 : After taking a homeopathic medicine, keep a gap of 5 to 10 minutes in the second medicine.
होम्योपैथिक दवा लेने के बाद दूसरी दवा में 5 से 10 मिनट का अंतर रखें।

Terms and conditions:
Homeopathic products should be used on the basis of symptoms.
For best results of homeopathic medicine the drug should be used according to the consultation of a doctor.
नियम और शर्तें:
लक्षणों के आधार पर होम्योपैथिक उत्पादों का उपयोग किया जाना चाहिए।
होम्योपैथिक दवा के सर्वोत्तम परिणामों के लिए दवा का उपयोग डॉक्टर के परामर्श के अनुसार किया जाना चाहिए।

Reviews

There are no reviews yet.

Only logged in customers who have purchased this product may leave a review.

%d bloggers like this: